कर्नाटक

Karnataka : कैबिनेट विस्तार जुलाई तक टल सकता है

Kavita2
24 Jun 2026 10:53 AM IST
Karnataka : कैबिनेट विस्तार जुलाई तक टल सकता है
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Karnataka कर्नाटक: मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मौजूदा स्थिति में कैबिनेट अपनी कुल क्षमता के मुकाबले केवल 41 प्रतिशत पर काम कर रही है, जबकि विस्तार को लेकर लंबे समय से राजनीतिक हलचल जारी है। हालांकि अब संकेत मिल रहे हैं कि यह विस्तार जुलाई तक टल सकता है।

जानकारी के अनुसार, राज्य मंत्रिमंडल में कुल 34 मंत्रियों की जगह फिलहाल केवल 14 मंत्री ही शामिल हैं। इस कारण प्रशासनिक कामकाज और राजनीतिक संतुलन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि 18 जून को होने वाले विधान परिषद (Legislative Council) चुनाव के बाद कैबिनेट विस्तार किया जाएगा, लेकिन अब इस प्रक्रिया में देरी की संभावना बढ़ गई है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से अंतिम मंजूरी न मिलने और प्रमुख नेताओं की अनुपलब्धता के कारण यह फैसला आगे खिसक सकता है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उपलब्ध न होने की वजह से इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है, जिसके चलते कैबिनेट विस्तार को अगले महीने तक टालने की स्थिति बन गई है।

राज्य की राजनीति में कैबिनेट विस्तार को लेकर कई सामाजिक समूहों और क्षेत्रीय नेताओं की ओर से दबाव भी बढ़ रहा है। विभिन्न समुदाय और इलाकों के नेता सरकार में प्रतिनिधित्व पाने के लिए सक्रिय रूप से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिससे मुख्यमंत्री के सामने संतुलन बनाना एक चुनौती बन गया है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्वयं भी स्वीकार किया है कि कैबिनेट में किसे शामिल किया जाए, इस पर निर्णय लेना आसान नहीं है। उन्होंने संकेत दिया है कि यह पूरी तरह से एक राजनीतिक और संतुलन साधने वाला निर्णय है, जिसमें विभिन्न जातीय, क्षेत्रीय और संगठनात्मक पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार में देरी के पीछे केवल तकनीकी या समय की बाधा नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रहे आंतरिक समीकरण भी एक बड़ी वजह हैं। विभिन्न गुटों के बीच संतुलन साधना और सभी को संतुष्ट करना पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बना हुआ है।

कर्नाटक सरकार के लिए यह विस्तार इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे न केवल प्रशासनिक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि आने वाले समय में राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय संतुलन भी प्रभावित होगा। वर्तमान में सीमित मंत्रियों के साथ सरकार पर कामकाज का दबाव अधिक है।

सूत्रों के अनुसार, कई वरिष्ठ नेता और विधायक लंबे समय से मंत्री पद की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में कैबिनेट विस्तार को लेकर उनकी नाराजगी भी धीरे-धीरे सामने आने लगी है। यह स्थिति पार्टी नेतृत्व के लिए आंतरिक असंतोष का कारण बन सकती है।

कांग्रेस हाईकमान की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

इस बीच, राज्य में विपक्षी दल भी सरकार पर कैबिनेट विस्तार में देरी को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इसे प्रशासनिक अस्थिरता का संकेत बता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे शासन की गति प्रभावित हो सकती है।

फिलहाल सभी की नजरें कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम और संभावित जुलाई के फैसले पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि राजनीतिक समीकरणों को साधने के बाद ही कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दिया जाएगा।

कुल मिलाकर, कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार को लेकर जारी अनिश्चितता ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है, और यह मुद्दा आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना रहेगा।

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